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दैनिक प्रतियोगिता #86

20 अगस्त, 2018

 

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें…

अहमद फ़राज़ के इस मशहूर शेर को आगे पूरा करें । ध्यान रहे अलफ़ाज़ आपके हों। तो अपनी शायरी का हुनर दिखाइए और भेज दीजिये अपने अशआर कल शाम ६.०० बजे तक हमारे वेबसाइट पर। बेहतरीन रचनाओं को हम सम्मानित करेंगे।

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