Wednesday, December 12, 2018
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समीक्षा हेतु

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पंख कटे तो क्या हुआ!

  ऋषि कुमार द्वारा समीक्षित : दुनिया की भीड़ में खुद को स्थापित करना एक बहुत बड़ी चुनौती है यदि कोई विकलांगता हो तो और भी...

एक क़दम

देखो उसे वो भारतीय नारी है, देखो वो एक विधवा नारी है, असमंजस मे हैं, की क्या चुने.. एक घर .. एक बूढ़े माँ बाप , एक...

Ek aur manjhi.

एक चट्टान है दिल में बहुत बड़ी चट्टान ना उस पार जाने देती है ना इस पार आने सोचती हूं एक और मांझी बन जाऊं अपनी पूरी ताकत लगाऊं और...

हमकदम

वो चुपचाप चलते कदम, वो राह में रुकते कदम । खामोशी से राह में, हमकदम बनते कदम । था अनकहा इंतज़ार, था अनकहा एतबार, खामोश हवाओं में घुली थी, साथ चलने...

वह तो तेरे पास आ रही थी

वह दौड़ रही थी, पूरी शक्ति लगाकर भाग रही थी, जैसे कोई दरिंदा पड़ा हो उसके पीछे; पर बऱखुरदार, वह तो तेरे पास आ रही थी। न जाने...

बस पूछना था

मैं तो रोज़ देखता हूँ तुम को क्या तुम भी उस नज़र से देख पाती हो ? जिस नज़र से मैं देखता हूं बस पूछना था। देखते ही...

आज भी तेरी दी हुई कसमें जिया करता हूँ मैं

जमात में तेरी भले ही शामिल न हो पाऊं पर तेरी रूह में अब भी डूबा हुआ हूँ मैं थोड़ा काला हूँ, थोड़ा बेकार सा भी...

रामराज्य

आँसू गिरे नयन उत्पल से पिघले शैल, अचल,पाहन सब भरे लबालब पुष्कर तट तक सरिता बहे कहे सिंधु से जल्दी इन्हें संभालो संसृति के ऊपर दुःखों की भारी...

घुटन

घुटन बाहरी हो या भीतर की बेचैन करती है दमन होता है स्वाभाविकता का खंडित करती है मैं होने को खीझ से भर देती है मन को क्या तमाम...

गज़ब के थे ना वो दिन

गज़ब के थे ना वो दिन जब तुम्हारे लबों पर बस नाम हमारा था, याद आते हैं ना वो दिन, जब तुम्हारी बस की सीट पर आधा...