Monday, December 10, 2018
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शायरी

तुम्हारे इश्क़ में पड़कर शुरू की शायरी मैंने, हुआ फिर यूं कि मुझको शायरी से इश्क़ हो बैठा। दोस्तों शायरी एक ऐसा दरिया है जहाँ से कोई कभी प्यासा नहीं लौटता। आप उदास होंगे तो शायरी आपको ख़ुशी देगी और बेचैनियों में सुकून देगी। शायरी जहाँ एक तरफ़ मोहब्बत से लबरेज़ अहमद फ़राज़ के अशआर को पनाह देता है, तो वहीँ इसके चमन में गुलज़ार के नज़्मी फूल भी खिलते हैं। इस दरिया के एक छोर पर जहाँ मीर बैठे हैं तो दूसरी ओर राहत इंदौरी। और बीच में है तो बस अलफ़ाज़ और एहसास। तो आइए, गोते लगाइए और डूब जाइये उर्दू और रेख़्ता के पानी में। लिखिए और पढ़िए, उर्दू ज़बान का हिंदी को दिया एक अज़ीज़ तोहफा, शायरी। तो भेज डालिये अपने अलफ़ाज़ जो आप पूरी दुनिया को बताना चाहते हैं, और हिस्सा बनें इस बेहतरीन कोशिश का | भेजी गयी रचनाओं की जांच की जाएगी। एक बार जब हम यह सुनिश्चित कर लें कि रचना मूलतः आपकी ही है तो इसे वेबसाइट पर अनुमोदित किया जाएगा। व्यवस्थापक द्वारा अनुमोदन के बाद आप लेख पर लाइक, शेयर, टिप्पणी और चर्चा कर सकते हैं। साथ ही, अगर आपने लेख पर समीक्षा के लिए आवेदन किया है, तो हम सुनिश्चित करेंगे कि आपको समीक्षा भी मिल जाएगी। तो देर किस बात की! इस ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म का सबसे अच्छा उपयोग करें, आइए इंकरैक्ट करें।

तसव्वर और हक़ीक़त – थोड़ा इश्क़

कब तक यूँही लहरों को ही शंखो को ढोना चाहिए, पागल सी लहरों को कभी सागर में खोना चाहिए। खफ़ीफ सा वो सीप, गहरा,कुछ गुज़ारिश कर...

ग़ज़ल

किसे मालूम, मुख़्तसर होगा, ख़त्म नाता ये इस क़दर होगा। वो एक झील तक नहीं निकला जिसे समझा कि समुन्दर होगा। नहीं सोचा था दिल-ए-शैदाई , एक धड़कता हुआ...

अनुभव

दिल की धडकन भी जब अनुभवी सी लगने लगी। मेरी हर खायलात तब कवि सी लगने लगी।। और जब ज़िन्दगी में हर मसले का समाधान समझ...

उल्फ़त समझ बैठे हम

इज़्तिरार थके हाथों ने हमारे कन्धों के लिये सहारे को कुछ पाने की नियतसे ली हुई हमदर्दी के सिसकियों को उसकी दोस्ती की उल्फ़त समझ बैठे...

खाली कमरा

कल‌ मेरे हाथों में सुर्ख छाले मिले, मेरे गुनाह कल उसके हवाले मिले। मेरी दकियानूसी मोहब्बत ज्यादा दिन न चली, उसके इश्क में तो बड़े-बड़े दाख़िल मिले। अक्सर...