Monday, December 10, 2018
Home हिंदी कविता

कविता

हिंदी साहित्य में काव्य की विधा बहुत पुरानी है। भक्ति काल से लेकर आधुनिक हिंदी काव्य तक कितने ही बदलाव आये हैं, लेकिन कविता का मूल उद्देश्य अभी भी जीवित है। कविता में लय मानव चेतना में रस का संचार कर एक अलग ही अनुभूति प्रदान करता है। लेकिन अन्य विधाओं की भांति, काव्य का भी मूल उद्देश्य अपने भावों को संप्रेषित करना है। तो इंकरैक्ट कवियों को एक मंच प्रदान कर रहा है अपनी रचनाएं प्रकाशित करने का। साथ ही इनपर समीक्षा भी प्राप्त करें। तो तो अपनी कविताएँ भेजिए और हिस्सा बनिए साहित्य के प्रसार हेतु अग्रसर इस ऑनलाइन कम्युनिटी का। भेजी गयी कविता की जांच की जाएगी। एक बार जब हम यह सुनिश्चित कर लें कि रचना मूलतः आपकी ही है तो इसे वेबसाइट पर अनुमोदित किया जाएगा। व्यवस्थापक द्वारा अनुमोदन के बाद आप लेख पर लाइक, शेयर, टिप्पणी और चर्चा कर सकते हैं। साथ ही, अगर आपने लेख पर समीक्षा के लिए आवेदन किया है, तो हम सुनिश्चित करेंगे कि आपको समीक्षा भी मिल जाएगी। तो देर किस बात की! इस ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म का सबसे अच्छा उपयोग करें, आइए इंकरैक्ट करें।

नर हो, न निराश करो मन को

नर हो, न निराश करो मन को कुछ काम करो, कुछ काम करो जग में रह कर कुछ नाम करो यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो समझो जिसमें...

मुझको याद किया जायेगा

आँसू जब सम्मानित होंगे मुझको याद किया जाएगा जहाँ प्रेम का चर्चा होगा मेरा नाम लिया जाएगा। मान-पत्र मैं नहीं लिख सका राजभवन के सम्मानों का मैं तो...

कोशिश करने वालों की

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती नन्ही चींटीं जब दाना ले कर चढ़ती है चढ़ती दीवारों पर...

रात हो जाए तो

रात हो जाऐ तो हम शाम बुझा देते हैं, उनके आने की आहट को अपने दिल मे जगा लेते हैं। रोज शाम को जलाकर उम्मीद...

सुनो दर्ज़ी मास्टर

सुनो दर्ज़ी मास्टर, फट रहा है मेरी रूह का पैराहन। अदब गिर रही है जैसे फटी जेबों से गिरते हैं सिक्के। अकेलेपन के साये में रंगत फ़ीकी...

बाबा नागार्जुन

प्रगतिशील आन्दोलन यानि प्रगतिवाद के पुरोधा कवि हैं वैद्यनाथ मिश्र ‘यात्री’ अर्थात् बाबा नागार्जुन। मूलत: प्रगतिवादी होने के बावजूद नागार्जुन प्रयोगशील भी हैं। बिहार के...

मशहूरियत!

निंदक निंदा ना करे , तो जग क्या जाने भाई, हम  कहा घुम के आए, कहा से की हमने पढ़ाई , कब हम बाज़ार को निकले...

पंख कटे तो क्या हुआ!

  ऋषि कुमार द्वारा समीक्षित : दुनिया की भीड़ में खुद को स्थापित करना एक बहुत बड़ी चुनौती है यदि कोई विकलांगता हो तो और भी...