Monday, December 10, 2018
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हिन्दी भारत और विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। उसकी जड़ें प्राचीन भारत की संस्कृत भाषा में तलाशी जा सकती हैं। परंतु हिन्दी साहित्य की जड़ें मध्ययुगीन भारत की ब्रजभाषा, अवधी, मैथिली और मारवाड़ी जैसी भाषाओं के साहित्य में पाई जाती हैं। हिंदी में गद्य का विकास बहुत बाद में हुआ और इसने अपनी शुरुआत कविता के माध्यम से जो कि ज्यादातर लोकभाषा के साथ प्रयोग कर विकसित की गई।हिंदी का आरंभिक साहित्य अपभ्रंश में मिलता है। हिन्दी साहित्य के आदिकाल को आलोचक १४०० इसवी से पूर्व का काल मानते हैं जब हिन्दी का उदभव हो ही रहा था। हिन्दी की विकास-यात्रा दिल्ली, कन्नौज और अजमेर क्षेत्रों में हुई मानी जाती है। हिन्दी साहित्य का भक्ति काल १३७५ वि0 से १७०० वि0 तक माना जाता है। यह काल प्रमुख रूप से भक्ति भावना से ओतप्रोत काल है। इस काल को समृद्ध बनाने वाली दो काव्य-धाराएं हैं -1.निर्गुण भक्तिधारा तथा 2.सगुण भक्तिधारा। हिंदी साहित्य का रीति काल संवत १७०० से १९०० तक माना जाता है यानी १६४३ई० से १८४३ई० तक। रीति का अर्थ है बना बनाया रास्ता या बंधी-बंधाई परिपाटी। इस काल को रीतिकाल कहा गया क्योंकि इस काल में अधिकांश कवियों ने श्रृंगार वर्णन, अलंकार प्रयोग, छंद बद्धता आदि के बंधे रास्ते की ही कविता की। आधुनिक काल हिंदी साहित्य पिछली दो सदियों में विकास के अनेक पड़ावों से गुज़रा है। जिसमें गद्य तथा पद्य में अलग अलग विचार धाराओं का विकास हुआ। जहां काव्य में इसे छायावादी युग, प्रगतिवादी युग, प्रयोगवादी युग और यथार्थवादी युग इन चार नामों से जाना गया, वहीं गद्य में इसको, भारतेंदु युग, द्विवेदी युग, रामचंद‍ शुक्ल व प्रेमचंद युग तथा अद्यतन युग का नाम दिया गया। हिंदी में साहित्य कार्य के उत्थान के लिए इंकरैक्ट अग्रसर है। तो अपनी रचनाएँ इंकरैक्ट पर भेजें और इस कोशिश का हिस्सा बनें।

क्या ढूँढता है

#dailychallenge कभी निकट आने को बेचैन हैकभी दूर जाने को बेचैन हैऔर कभी कभी तो बस यूँहीबेचैन हो जाने...

शायरी

इस दौर में मैं कुछ नहीं उस दौर होता तो कुछ और होता

दूसरी आज़ादी

“दाऊ ले लो ना, 5 रुपए का ही तो है!!” “नहीं लेना ना! और एक बात बता, स्कूल क्यों...

नर हो, न निराश करो मन को

नर हो, न निराश करो मन को कुछ काम करो, कुछ काम करो जग में रह कर कुछ नाम करो यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो समझो जिसमें...

मुझको याद किया जायेगा

आँसू जब सम्मानित होंगे मुझको याद किया जाएगा जहाँ प्रेम का चर्चा होगा मेरा नाम लिया जाएगा। मान-पत्र मैं नहीं लिख सका राजभवन के सम्मानों का मैं तो...

कोशिश करने वालों की

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती नन्ही चींटीं जब दाना ले कर चढ़ती है चढ़ती दीवारों पर...

हास्य

गरमी का मौसम है आम खरीद कर खाइये और पोस्ट पढ़िये| दू गो बेनीफिट है एक तो आम का स्वाद और साथ में विटामिन...

तसव्वर और हक़ीक़त – थोड़ा इश्क़

कब तक यूँही लहरों को ही शंखो को ढोना चाहिए, पागल सी लहरों को कभी सागर में खोना चाहिए। खफ़ीफ सा वो सीप, गहरा,कुछ गुज़ारिश कर...

ग़ज़ल

किसे मालूम, मुख़्तसर होगा, ख़त्म नाता ये इस क़दर होगा। वो एक झील तक नहीं निकला जिसे समझा कि समुन्दर होगा। नहीं सोचा था दिल-ए-शैदाई , एक धड़कता हुआ...