Saturday, February 23, 2019

फिर ये बारिश…

फिर ये बारिश मिरी तंहाई चुराने आई अपनी बूंदों से तिरा अक्स बनाने आई । इतना रोया कि जमाने को खबर हो जाती खुद बरस कर मिरे...

दैनिक प्रतियोगिता #29

झाँसी की रानी सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी, बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी, गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी...

दैनिक प्रतियोगिता #22

उपन्यास का नाम -- मारे गए गुल्फ़ाम लेखक का नाम -- फनिश्वरनाथ रेणु

13.06.18 दैनिक प्रतियोगिता उत्तर

उपर्युक्त चित्र का सम्बंध राज कपूर की फ़िल्म "तीसरी क़सम" से है, जो प्रसिद्ध लेखक फणीश्वरनाथ 'रेणु' की कहानी "मारे गए गुलफ़ाम" पर आधारित...

Daily challenge 21

बाधायें आती हैं आयें घिरें प्रलय की घोर घटायें, पावों के नीचे अंगारे, सिर पर बरसें यदि ज्वालायें, निज हाथों में हंसते-हंसते, आग लगाकर जलना होगा। कदम मिलाकर चलना होगा। By:-...

उम्र और एक कमरा!

बयानबे(९२)साल के आदमी है, उनकी पत्नी को गुज़रे कुछ ही महीने हुए है, और मैं उनसे मिलने आइ हूँ, शब्दों से ब्या तो नहीं करते पर आँखें...

अनुभव

दिल की धडकन भी जब अनुभवी सी लगने लगी। मेरी हर खायलात तब कवि सी लगने लगी।। और जब ज़िन्दगी में हर मसले का समाधान समझ...

मशहूरियत!

निंदक निंदा ना करे , तो जग क्या जाने भाई, हम  कहा घुम के आए, कहा से की हमने पढ़ाई , कब हम बाज़ार को निकले...

पर्यावरण दिवस

पनाह दी थी जिसने कितने रहरवों को धूप से, सुना है अबकी  धूप में वही  चिनार जल गया। - 'रोहित-रौनक़'

पंख कटे तो क्या हुआ!

  ऋषि कुमार द्वारा समीक्षित : दुनिया की भीड़ में खुद को स्थापित करना एक बहुत बड़ी चुनौती है यदि कोई विकलांगता हो तो और भी...