मशहूरियत!

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निंदक निंदा ना करे , तो जग क्या जाने भाई,

हम  कहा घुम के आए, कहा से की हमने पढ़ाई ,

कब हम बाज़ार को निकले , कब किस से भेंट कर आइ,

निंदक निंदा ना करे, तो जग क्या जाने भाई,

नाम हमारे मशहूर ऐसे थोड़ी है,

गालियों मे बातें ऐसी थोड़ी है,

दुनिया घुम आए  हम , मिला ना  ऐसा कोई,

जो निंदा ना करे,

तो निंदाक कहाँ से आए भाई,

शहरो मे बातें  बने कैसे, महोल्लो  की रौनक़ जागे कैसे,

जो निंदक ना  हों भाई, काम कैसे चलाई..

निंदक से सिख लियो की तुम  भी  काई गालियों, महोल्लो, शहरो , और घरों  में,

मोजुद ना होते हुए भी, उनकी शामें हसीन कट टी है,

तुम जो इतने मशहूर हो,

की निंदक की बातें,  तुम  पे जा कर अटकती है,

सिख लियो,

जे निंदक निंदा ना करे!

तो गुमनाम हो जाओगे तुम!

इसलिए जे निंदक निंदा ना करे, तो जग  क्या जाने भाई!

सूक्रिया!

हमारी मशहूरियत के लिए!

 

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