याराना

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कहा था उसनॆ गिरॊगॆ एक दिन,
मगर संभलना भी उसी ने सिखाया|
दिल की ज़िद्द और मन की चाहत में मैं भूल गया और रुक ना पाया।
उसके पतंग के मंझधागों को छॊड़कर​, मैंने रेशम की डॊर को अपनाया।
लो टूट गई वो रेशम की डॊर, जिसमें बंधा मैं उड़ ना पाया।
अब लगी है ठोकर तो सर झुकाये, लौट कर बुध्दू घर को आया।
कहा था उसने गिरोगे एक दिन​,
और अब मरहम भी उसी ने लगाया।
दर्द मिला तो आँसु बहाने फ़िर से उसी का कंधा पाया।
हर दोस्ती की दासतान है ये जो इश्क़ से है लड़ता आया।
बीत गयी सो बात गयी, ये कहकर उसने मुझे समझाया।
उदासी के उस दाैड़ में, खुशियों को उसने कर्ज़ में लाया।
कहा था उसने गिरोगे एक दिन,
आज अाँसु पोछकर दोस्ती का है फ़र्ज़ निभाया।

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