प्यार तो होना ही था

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प्यार तो हम भी तुमसे बेईन्तहा करते है,

होठों से ना सही, नज़रों से तो बयाँ करते है।

इतना मुश्किल भी तो ना है ये बताना,

पर फ़िर भी न जाने क्यूँ , ये कहने से डरते है।

शायद तुम मे भी इश्क़्खुमार बसता है।

क्यूँकि जब व ये दीवना तेरे करीब अाता है,

तेरी पलकें झुक जाती है अौर होठों पे मुस्कान होता है।

शायद ये लुका छ्पिी क खेल तुम्हे खूब रचता है।

हम तो ठहरे डरपोक, पर तुम मे तो साहस बसता है!

फ़िर क्यूँ तुम्हरा दिल इश्क़ का इज़हार करने से डरता है?

चलो ये सिलसिला अभी चलने देते है।

तुम्हारे दिल को थोड़ा और पिघलने देते है।

कभी तो नज़र उठाकर तुम भी देखोगी हमे

कभी तो ढाइ आखर प्रेम के तुम भी तो कहोगी हमे।

हम उस दिन का सबर से इन्तज़ार करेंगे।

फ़िर हमरा लुका छ्पिी का खेल खत्म होगा,

और हम दोनों आँखो से आँखे मिलाकर नज़रे चार करेंगे।

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